एक मुठी ज़िन्दगी
दो भीगा ज़मीन
बस ऐसे ही कुछ मुख्दूं में है
कैद नसीब तेरा ...
वक़्त बदल जाता है
दुनिया बदल जाती है
कहने को तोह इंसान की
पहचान बदल जाती है l
पर मूढ़ के देखो तोह कुछ नहीं बदलता
किसी को हक नहीं तोह किसी को सहारा नहीं मिलता ...
ऐसे में एक जो है
वोह तुम ही हो खुदा
अपने आप की, अपनी किस्मत की
बस तुम ही हो दुआ ...
न छोड़ अपना साथ
कहते हैं मिआं
सितारून से आगे जहाँ और भी हैं
यहाँ सिअक्दों कारवां और भी हैं ll
बस यूँ सोच लो की आगे मुकाम और भी हैं
सुनते सिमत्तेह हैरत-इ-होंसला और भी हैं ll
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